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हमारे बारे में...

 

बुन्देलखण्ड मध्य भारत का एक प्राचीन क्षेत्र है। इसका विस्तार उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में है। बुंदेली इस क्षेत्र की मुख्य बोली है।

भौगोलिक और सांस्‍कृतिक विविधताओं के बावजूद बुंदेलखंड में जो एकता और समरसता है, उसके कारण यह क्षेत्र अपने आप में सबसे अनूठा बन पड़ता है। बुंदेलखंड की अपनी अलग ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्‍कृतिक विरासत है। बुंदेली माटी में जन्‍मी अनेक विभूतियों ने न केवल अपना बल्कि इस अंचल का नाम खूब रोशन किया और इतिहास में अमर हो गए। बुन्देलखण्ड के पर्वों की अपनी ऐतिहासिकता है। उनका पौराणिक व आध्यात्मिक महत्व है और ये हमारी संस्कृतिक विरासत के अंग हैं।

बुंदेली समागम एक ऐसी संकल्पना है जिसका केंद्र बिंदु लगभग 20 जिलों में बोली जाने वाली बुंदेली भाषा, कला और संस्कृति है। बुंदेलखंड के विशेष संदर्भ में यहां की धार्मिक मान्यताएं ऐतिहासिक तथ्य एवं कला तथा सांस्कृतिक विमर्श को प्रोत्साहन देना इस समागम का उद्देश्य है। आर्थिक दृष्टिकोण से बुंदेलखंड में प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों की असीम संभावना को गहनता से समझने हेतु यह आयोजन किया जा रहा है। यह प्रयास है कि एक ही छत के नीचे देश के कोने-कोने से आए लोग बुंदेलखंड की अनछुई धार्मिक, ऐतिहासिक, आर्थिक और कला संस्कृति तथा खानपान की समृद्ध परंपराओं एवं अवर्णनीय धरोहर को समझ सके। यह आयोजन बुंदेलखंड के चहुंमुखी विकास में शासन एवं आमजन के सहयोग द्वारा बुंदेलखंड के बहुमुखी विकास हेतु सार्थक प्रयास करने के लिए कटिबद्ध है।

हमारी बुंदेलखंडी बोली के बारे में...

 

बुंदेली यूं तो एक बोली है लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड, महाकौशल और नर्मदांचल के 20 से अधिक जिलों का सीधे तौर पर सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करती है। वहीं प्रदेश के चारों महानगरों में भी बुंदेली आबादी बड़ी संख्या में है। लगभग 3 करोड़ की बुंदेली आबादी के लिए विकास, संस्कृति और साहित्य का एक अनूठा कार्यक्रम सितम्बर माह में प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में हम दुनिया के लगभग 20 देशों में, देश के सभी राज्य में बसे बुंदेलियों को एक मंच पर लाकर अपनी माटी और अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करेंगे। यह 2 दिवसीय कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में होगा। जिसमें आपका सहयोग अपेक्षित है।